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Deepak Chandra

दीपक चन्द्र

जन्म, दूसरा अगहन, 18 नवम्बर, 1938, शिक्षा—कोलकाता विश्वविद्यालय से एम.ए., बी.एड., पीएच.डी.। भूतपूर्व संपादक : स्फूलिंग, साधारण संपादक  और सह-सभापति: राइटर्स क्लब; सह-सभापति: वंश साहित्य संस्कृति सम्मलेन, सक्रिय सांस्कृतिककर्मी बांग्ला अकादमी, भारतीय संस्कृति भवन। पुरस्कार: माइकेल मधुसूदन दत्त, श्यामाप्रसाद मुखोपाध्याय, शक्ति चट्टोपाध्याय। लिखने-लिखाने के शिक्षारम्भ (किसी को शिक्षा में प्रवृत्त करने) कॉलेज में 1971 से नियमित लेखन। कहानी, उपन्यास एवं समालोचना ग्रन्थों की संख्या—55, इसके अतिरिक्त पुराणों को आज के आधुनिक दर्शन के अनुसार जितना संभव हो सका, उपयोगी बना ढेर सारे पाठकों-पाठकियों को इस तरफ खींचने में सफल रहे हैं। उनकी सफलता के सन्दर्भ में डॉ. शिशिर कुमार दास कहते हैं—’’आप आधुनिक बांग्ला साहित्य के सुपरिचित लब्धप्रतिष्ठित लेखक हैं।...आप अपना एक स्वतन्त्र क्षेत्र तैयार कर चुके हैं। स्वत स्फूर्ति लेखन एवं कल्पना की शक्ति आपको वर्तमान बांग्ला साहित्य में एक विशिष्ट स्थान दिलाती है।'’ इतिहास पुनर्निर्माण के समय उनकी कहानियां मन के गहराइयों के रहस्य की तरफ झुकी हैं, साधारण मनुष्यों की तरफ। फलस्वरूप पौराणिक चरित्रों के प्रति जानने योग्य बातों (धारणा) के प्रति अनुभूति कुछ बदलने के ध्येय से ऐसा किये।