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Dr. Govind Gare

गोविन्द गारे

वारली आदिवासी जीवन और संस्कृति को। गहराई और संवेदनशील ढंग से समझने में डॉ0 गोविन्द गारे के श्रम की अनदेखी नहीं की जा सकती। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा से संबद्ध रहे हैं। अपनी व्यस्तता के बावजूद 42 वर्षों तक उन्होंने वारली आदिवासियों की जीवन-शैली को समझकर वारली चित्रों का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया। उनके कार्यों का आकलन करते हुए उन्हें विभिन्न पुरस्कार प्रदान किये गये थे। मराठी समाजशास्त्र परिषद के पुरस्कार के अलावा उन्हें ‘शिवनेरी भूषण', ‘आदिवासी भूषण' तथा और भी कई पुरस्कार-सम्मानों से विभूषित किया गया। उन्हें दिवंगत हुए कुछ वर्ष हुए हैं।