Loading... Please wait...

Gyanranjan

ज्ञानरंजन

सुपरिचित स्वतन्त्रता सेनानी लेखक और सामाजिक कार्यकर्त्ता श्री रामनाथ सुमन के पुत्र। जबलपुर के एक महाविद्यालय के अध्यापन से सेवानिवृत्त। नयी कहानी की परवर्ती पीढ़ी के समादृत कथाकार। हिन्दी की शीर्षस्थ पत्रिका 'पहल' के प्रकाशक, संपादक और अपने आपमें एक सम्पूर्ण आन्दोलन। मनुष्य के सामाजिक सरोकारों और संबंधों की समीक्षा करते हुए उसके स्वार्थों, द्वन्द्वों और दुविधाओं के सूत्र तक गहरे उतरनेवाली संवेदनात्मक अभिव्यक्ति के लिए जाने जानेवाले लोकप्रिय कथाकार। कहानियां अंग्रेजी, पोलिश, जर्मन और भारतीय भाषाओं में अनूदित तथा देश और विदेश के कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में शामिल। कृतियां 'फेन्स के इधर और उधर', 'यात्रा' तथा 'प्रतिनिधि कहानियां (कहानी संग्रह) 'कबाड़खाना' (कथेतर गद्य)।