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Lily Rey

लिली रे

जन्म : 26 जनवरी 1933 को मधुबनी में। पिता आइ पी एस थे और अपनी नौकरी के सिलसिले में बार-बार नयी जगहों पर उनका स्थानान्तरण होता रहता था। इस कारण बचपन विभिन्न स्थानों में गुजरा। 12 वर्ष की उम्र में विवाह। वैवाहिक जीवन के आरंभिक वर्ष गोमिया (वर्तमान में झारखण्ड में) में बीते, फिर कानपुर, कोलकाता और भूटान में। मिथिला से प्राय : दूर रहने के बावजूद मैथिली कला-शिल्प और लोकगीतों से गहरा जुड़ाव। रंगमंच में भी रुचि रही। आधुनिक मैथिली कथा-साहित्य की प्रतिनिधि हस्ताक्षर। शुरू में ‘कल्पना शरणं के छद्मनाम से लिखा। मैथिली साहित्य को आंचलिकता से बाहर निकालने और स्त्री-दृष्टिकोण से समृद्ध करने में महती योगदान दिया। कृतियों में रूढ़िवादी सामाजिक परम्पराएँ, सामन्ती मूल्यबोध, परम्परागत मूल्यों में क्षरण और युवा पीढ़ी की हताशा का आलोचनात्मक चित्रण। अनेक कृतियों का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद। फिलहाल दार्जिलिंग में निवास। प्रमुख कृतियां : 'रंगीन परदा', 'अन्तराल', 'पटाक्षेप', 'मरीचिका', 'अबूझ', 'जिजीविषा', 'विशाखन', 'विल टेलर की डायरी' आदि। 
पुरस्कार/सम्मान : मरीचिका (उपन्यास) के लिए 1982 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार, मैथिली साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए 2004 में प्रबोध साहित्य सम्मान।