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Ravindranath Thakur

रवीन्द्रनाथ ठाकुर

महर्षि देवेन्द्रनाथ ठाकुर और शारदा देवी की चौदहवीं सन्तान के रूप में 7 मई 1861 को कोलकाता में जन्म। प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई। बाद में अध्ययन के लिए इंग्लैण्ड गये। संगीत, कला और लेखना का माहौल विरासत में मिला। संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी भाषा-साहित्य के प्रति बचपन से ही रुचि रही। सन् 1883 में मृणालिनी देवी से विवाह हुआ, पांच सन्तानों के पिता हुए पर एक-एक कर सबका बिछोह सहना पड़ा। वियोग ने उन्हें अधिक उदात्त, मानवीय और वैश्विक बनाया। देश-विदेश की यात्रा की। लगभग हर विधा में लिखा। संगीत, नाटक कला और चित्रकला में भी उल्लेखनीय योगदान। कुल पुस्तकों की संख्या प्राय: दो सौ। गीत संग्रह ‘गीतांजलि' पर वर्ष 1913 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार, साथ ही देश-भर में अकूत सम्मान। महात्मा गाँधी ने ‘गुरुदेवं की उपाधि दी। ‘विश्वकविं की पदवी से विभूषित किये गये। वे एक मौलिक चिन्तक थे, जिसका प्रमाण है शिक्षा और शिल्प के उनके द्वारा स्थापित मॉडल ‘शान्तिनिकेतन' और ‘श्रीनिकेतन'। एक तरह से कहा जाय तो इस सम्पूर्ण भारतीय महाद्वीप की बौद्धिक मनीषा के प्रतीक बन गये कविगुरु रवीन्द्रनाथ।  7 अगस्त 1941 को उनका निधन हुआ।