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Samresh Mazumdar

समरेश मजुमदार

बचपन डुवार्स के चाय-बागान में बीता। जलपाईगुड़ी जिला स्कूल के छात्र थे। सन् 1960 में कोलकाता आये। शिक्षा : स्कॉटिश चर्च कॉलेज में बांग्ला में ऑनर्स। कोलकाता विश्वविद्यालय से एम.ए.। लेखन : पहले ग्रुप थियेटर में कलाकार थे। वहीं पर नाटक लिखते-लिखते कहानी लिखने की शुरुआत। पहली कहानी सन् 1967 में बांग्ला की चर्चित पत्रिका ‘देशं में छपी। प्रकाशित पुस्तकें : दौड़, एई आमि रेणु, उत्तराधिकार, बन्दीनिवास, बड़ो पाप हे, उजान, गंगा, वासभूमि, लक्खीर पांचाली, उनीस-बीस, सवार, शरणागत एवं कालबेला (सभी उपन्यास), इसके अलावा अनगिनत कहानियां। सम्मान : 1982 में ’आनन्द पुरस्कारं। इसके अलावा ‘दौड़' सिनेमा के कहानीकार के रूप में उनको बी.एफ.जे., दिशारी एवं चलचित्र प्रसार समिति का पुरस्कार भी मिला है। सन् 1984 में ‘कालबेला' उपन्यास के लिए उन्हें साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिला। इस उपन्यास पर अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त निर्देशक गौतम घोष बेफिक्र बनायी है।