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Upendranath Ashk

उपेन्द्रनाथ अश्क

अश्क जी गत चालीस वर्षों से कथा-साहित्य में योग देते आ रहे हैं। अपने चालीस वर्षों के कथा-लेखन में उन्होंने सभी प्रमुख प्रवृत्तियों को आत्मसात किया है और हिन्दी कथा साहित्य के क्षेत्र में चिरस्थायी कृतियाँ दी हैं।

उपन्यास
निमिषा।
गिरती दिवारें।
शहर में घूमता आईना।
एक नन्हीं किन्दील।
बाँधों न नाँव इस ठाँव।
गर्म राख।
बडी-बड़ी आँखें।
सितारों के खेल।
एक रात का नरक।
पत्थर-अलपत्थर।
छोटे-बड़े लोग।
कहानी संग्रह
सत्तर श्रेष्ठ कहानियाँ।
छींटें।
काले साहब।
जुदाई की शाम का गीत।
बैंगन का पौधा।
आकाशधारी।
पलँगे।
दो धारा।
कहानी लेखिका
और जेहलम के सात पुल।
पिंजरा।