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Vidyasagar Noutiyal

विद्यासागर नौटियाल

जन्म : 29 सितम्बर, 1933 (टिहरी गढ़वाल में, भगीरथी के तट पर बसे मालीदेबल में) 
शिक्षा : रियासत के विद्यालय विहीन सुदूर जंगलों में अपने घर पर, बाद में टिहरी, देहरादून तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में। कार्याक्षेत्र : तीस वर्षों तक वकालत। टिहरी रियासत के विरुद्ध छेड़े गये स्वतन्त्रता आन्दोलन में सक्रिय पहली भागीदारी गिरफ़्तारी 18 अगस्त 1947 को टिहरी में, 1958 में ऑल इण्डिया सटूडेण्ट्स फेडरेशन के उदयपुर अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित। उत्तर प्रदेश विधान सभा में सदस्य रहे। वनों के अन्धाधुंध विनाश के विरुद्ध चिपको आन्दोलन के शुरुआती कार्यकर्ता। 1960 से कयुनिस्ट पार्टी के कुलवक्ती कार्यकत्ताü के रूप में लगातार टिहरी में निवास। टिहरी बा¡ध के निर्माण के प्रमुख विरोधी। बाँध से विस्थापित होने के बाद देहरादून में स्थायी निवास। 
रचनाएं : पहली कहानी ‘भैंस का कट्या', ने 1954 में ‘कल्पना' में प्रकाशित होते ही हिन्दी कथा जगत में पहचान कायम कर ली। अब तक ‘टिहरी की कहानियां', ‘सुच्ची डोर', ‘दस प्रतिनिधि कहानियां', कथा संग्रहों के अलावा उपन्यास : ‘उलझे रिश्ते', ‘भीम अकेला', ‘सूरज सबका है', ‘उत्तर बायां हैं, ‘झुण्ड से बिछुड़ा', ‘यमुना के बागी बेटे', ‘आत्मकथ्य', ‘मोहन गाता जाएगा' तथा संस्मरण : ‘देशभक्तों की कैद में' प्रकाशित हो चुके हैं। 1999 के पहल समान तथा ‘सूरज सबका है' पर म.प्र. साहित्य परिषद द्वारा अखिल भारतीय की वीरसिंह देवी पुरस्कार से अलंकृत। संपर्क : डी-8, नेहरू कॉलोनी, देहरादून, उत्तराखण्ड-248001।