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Aagman

RRP:
Rs 160.00
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ISBN:
978-81-89962-65-4
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Preface

आगमन 

ओमप्रकाश गंगोला की कहानियां अपने विशिष्ट कथ्य के कारण बिलकुल अलग तरह की भावभूमि में ले जाती हैं। उनकी प्रथम कहानी 'वापसी' को 'विकल्प' में प्रकाशित करते हुए शैलेश मटियानी ने लिखा था -

कथ्य, भाषा, शिल्प एवं अपने अनुभवों की संरचना की इतनी कलात्मक निपुणता जिन नये लेखकों में हो, निसंकोच कहा जा सकता है कि वे हिन्दी कहानी को स्तरीयता के उच्चतम सोपानों तक ले जा सकेंगे।

प्रसिद्ध रचनाकार, आलोचक और विचारक पद्मश्री रमेशचन्द्र शाह का उनकी कहानियों के बारे में कहना है—

ओमप्रकाश की कहानियों ने चकित किया है।...यह तय है कि लेखक का जीवन के प्रति, मनुष्य के प्रति एक 'सीरियस' नैतिक और मूल्यवेत्ता दृष्टिकोण है। पुरानी शब्दावली में कहा जाए कि एक आस्थावान आशावाद का नज़रिया है। यही चीज है जो गंगोला की कहानियों को अपनी अलग छाप देता है। ये कहानियां पाठक के मर्म को छूएंगी।

अपने को, अपनी सीमाओं को, अशक्तता को, अपने ही बूते लांघ सकने की मानवीय संभावना की कौंध मुझे लगता है, बहुत मर्म की चीज है और साहित्य से उसी को पकड़ने, सगुण बनाकर झलकाने, सम्प्रेषित करने की अपेक्षा हर समय में लोग करते आये हैं। आज यह अपेक्षा पूरी करना—आज के मूल्यगढ़ और संवेदनशून्य परिवेश में पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल है और इसे पुराने ढंग से प्रेमचन्द और सुदर्शन के ढंग से कतई नहीं किया जा सकता। इसीलिए शायद कहानीकारों ने भी मान लिया है कि यह कहानी का काम नहीं है परन्तु गंगोला के संग्रह से यह सिद्ध है कि यह बात न केवल संभव है, बल्कि सर्वथा वांछनीय भी है और कहानी विधा के सहज सामर्थ्य का अंग भी। 'आगमन' कथा संग्रह ऐसी ही रचनाओं का आगमन है।


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