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Aaj Kal Ya Suo Varsh Bad

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Rs 100.00
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ISBN:
81-89850-36-9
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Preface

आज कल या सौ बरस बाद 

जो मैं लिख चुकती हूँ, उसके बाद उस रचना से जैसे मेरा कोई रिश्ता नहीं रहता। सब जैसे दूर हट जाता है। इस कविता पर मेरा नाम है, उससे भी मेरी कोई एकात्मता नहीं है।

यह एक कविता है

ये कुछ कविताए हैं

यह मैं हूँ—

इन शब्दों में मैं जैसे खो गई हूँ। फिर भी यह मेरी पूरी अनुपस्थिति नहीं है। कविता में ऐसे अनेक प्रतिभास हैं, जहां मैं अपना होना नकार नहीं सकती।

शायद सारांश में मैं हूँ।

अमृता भारती


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