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Aakash Se Jhankta Weh Chehra

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ISBN:
81-89914-06-5
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Preface

आकाश से झांकता वह चेहरा

कामतानाथ की कहानियों में छठे-सातवें दशक से लेकर आजतक से समय को सांस लेते हुए सुना जा सकता है। उनके अनुभव के दूर-दूर तक फैले दायरे में यूं तो बहुतेरे चित्र और चरित्र हैं मगर उनके आघात के केन्द्र मुख्यत मध्यम और निम्नमध्यम वर्गी  चरित्र रहे हैं जो अपनी छोटी-छोटी इच्छाओं के लिए बड़ी-बड़ी फजीहतें उठाते हैं। ये निरन्तर अकेले पड़ते जा रहे लोग हैं—कहीं समूह के स्तर पर तो कहीं व्यैक्तिक,कहीं ट्रेड यूनियन जैसे आन्दोलन के स्तर पर तो कहीं परिवार के स्तर पर नितान्त तनहा गुमनाम मौतें मरते अलग-थलग पड़ते हुए लोग। इन गुमनाम मौतों से भी ट्रेजिक हैं प्रेम, साहचर्य, भाईचारा जैसे मूल्यवान मूल्यों और संबंधों की मौतें।

कामतानाथ के यहाँ समय कोई ठहरा हुआ जल नहीं, बल्कि एक चलमान धारा है, जहाँ पिता पुत्र में संक्रमित हो रहा है, और नई पीढ़ी पुरानी पीढ़ी में...। 'शिकस्त', 'सोवियतसंघ का पतन क्यों हुआ','निमाई दत्ता की त्रासदी' आदि कहानियां इकहरी कहानियां नहीं हैं,उनकी कई-कई परतें,कई-कई शेड्स हैं। अकारण नहीं कि 'संक्रमण'जैसी कहानियों की परतों को खोलने के लिए प्रख्यात अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और राष्ट्रीय नाटक विद्यालय के रंगकर्मियों को कई-कई मंचन करने पड़ते हैं।

कामतानाथ जी की विशिष्ट कहानियों को पाठकों को सौंपते हुए हमें खुशी है।


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