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Aapne Hone Ka Such

RRP:
Rs 200.00
Your Price:
Rs 150.00 (You save Rs 50.00)
ISBN:
978-81-89962-87-6
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Preface

अपने होने का सच

युवा कवयित्री रश्मि खेरिया की कविताओं में एक प्रबुद्ध स्त्री दृष्टि निरन्तर सजग और सक्रिय दिखती है। यह नई स्त्री है जो अच्छी तरह जानती हैं कि वह सिर्फ स्त्री नहीं क्वपूरा स्त्री वंशानुक्रम हैं। यह स्त्री बाजार और तकनीक के दबाव से लगातार जटिल होती जीवन स्थितियों के बीच मनुष्यता,प्रेम,पर्यावरण और प्रकृति को बचा लेने की मार्मिक अपील करती है। कहना न होगा यह संवेदनशील स्त्री अपनी रचनात्मक ऊर्जा के साथ प्रसवपीड़ा के उसी दर्द से गुजर रही है जिससे क्वनई सोच को जन्म देने के लिए प्रकृतिं गुजरती है। यह उस 'इमोशन इण्टेलीजेंस'की कवितायें हैं जो पितृसत्ता की तयशुदा नैतिकता से परे बिल्कुल अलग नयी दृष्टि से देखती हैं जैसा कि अरुंधति राय कहती है,औरत इस दुनिया को उस तरह नहीं देखती जिस तरह मर्द।


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