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Aine Ke Samne

RRP:
Rs 150.00
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ISBN:
81-89850-73-3
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Preface

आईने के सामने 

'शीशमहल' का दरवाजा मुंह बाये खड़ा था। बीच में एक लालटेन जल रही थी...अन्दर जाते ही देखा, राजिन्दर के चारों ओर, वे चारों काले कुत्तों मरे पड़े थे। उनके दिल में गोलियां लगी थीं। 'अमीर', 'गरीब', 'मालिक' और 'नौकर' चारों पास-पास सोये थे। चारों राजिन्दर के पार्थिव शरीर की रखवाली कर रहे थे। आईने की तरफ नज़र पड़ते ही मैं चौंक उठा...लिखा था—'शेर का बच्चा कभी भी कुत्तों का नेता नहीं बन सकता। हमेशा कुत्तों का नेता कुत्ता ही हो कसता है।'

कहानी रचने में बुद्धदेव गुहा का कोई सानी नहीं। 'आईने के सामनें उनकी पांच कहानियों का संग्रह है—एक बड़ी, चार छोटी...। व्यक्ति स्वाधीनता और स्वाभिमान और गरीबों के प्रति करुणा का भाव, इन कहानियों के मुख्य स्वर हैं।


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