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Akeli

RRP:
Rs 275.00
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ISBN:
81-89914-51-0
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Preface

अकेली 

एक महीने में ही घर का जैसे सबकुछ बदल गया है। उसे वह दिन याद आया, जब वह डॉक्टर के यहा¡ से पापा की एक्स-रे प्लेट के साथ रिपोर्ट लेकर आयी थी कि उन्हें क्षय है। रास्ते-भर वह यही सोचती आयी थी कि पापा को रिपोर्ट कैसे देगी? उसपर उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी? दवाइयों का लम्बा नुस्खा और हिदायतों की लम्बी सूची समस्या के दूसरे पहलू को भी उभार-उभारकर रख रही थी। कैसे वह सब करेगी? करना तो सब उसी को है। पिछले चार सालों से इस घर के लिए वही तो सब कुछ करती आयी है। वही तो पापा की पहली सन्तान है और पापा हमेशा ही कहते थे, वह उनकी लड़की नहीं, लड़का है। शुरू से ही उसे लड़कों की तरह पाला...बचपन में वह लड़कों के साथ खेली, लड़कों के साथ पढ़ी और अब लड़के की तरह ही इस घर को संभाल रही है। पर अब?


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