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Apni Chaya

RRP:
Rs 280.00
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ISBN:
81-89914-73-1
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Preface

अपनी छाया

पवित्र सौन्दर्य का अनोखा प्रतीक था डोरियन ग्रे। ऐसी दिव्य सुन्दरता, जिसकी व्याख्या भी सम्भव नहीं। उसके रूप-लावण्य से प्रभावित चित्रकार बासिल उसका एक चित्र बनाता है। अब शुरू होता है डोरियन ग्रे का वह द्वन्द्व, जो मनुष्य के अन्दर और बाहर के संबंधों को उजागर करता है।

अंग्रेजी साहित्य में शेक्सपियर के बाद सबसे बड़े रचनाकार ऑस्कर वाइल्ड के उपन्यास ‘अपनी छाया’ (द पिक्चर ऑफ डोरियन ग्रे) में बहुत रोचक और मार्मिक ढंग से बताया गया है कि मनुष्य अपने स्वार्थों के कारण यह नहीं देख पाता कि वह कहाँ गलत है, लेकिन फिर भी एक-न-एक दिन पाप 'अपनी छाया' निश्चित रूप से डालता है। देश-विदेश के साहित्य जगत् में यह उपन्यास अत्यन्त लोकप्रिय हुआ है और आज भी दुनिया-भर में इसके असंख्य पाठक हैं।

प्रसिद्ध कथाकार रामकुमार ने ऑस्कर वाइल्ड के इस विश्व प्रसिद्ध उपन्यास का अनुवाद किया है। प्रकाशन के सौ से ज्यादा वर्ष होने के बाद भी आज तक इसकी भरपूर प्रशंसा की जाती है।


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