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Azadi Ki Basti

RRP:
Rs 250.00
Your Price:
Rs 188.00 (You save Rs 62.00)
ISBN:
81-89850-48-2
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Preface

आज़ादी की बस्ती 
क्वआज़ादी  की बस्तीं भले ही प्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी, पत्रकार और लेखिका मनोरमा दीवान के शुरूआती जीवन के उन दस-ग्यारह वषोZ का संस्मरण हो पर यह पाठकों के लिए भारत की आज़ादी के लिए लड़े जाने वाले संघर्ष का एक अलग नज़रिये से देखा गया दस्तावेज है। यह कृति केवल आजादी का संघर्ष ही नहीं इतिहास से भी हमें परिचित कराती है।
देश को  आज़ाद हुए अर्धशती से ज्यादा  हो जाने के बावजूद हम गुलामी से मुक्त होने के लिए किये  जाने वाले बलिदान, स्वतन्त्रता सेनानियों  के संघर्ष और उनमें शामिल लोगों  की भावनाओं को भुला नहीं सकते। उनकी बातें, उन दिनों की घटनाए¡ हमेशा प्रासंगिक बनी रहेंगी और देश की तरुणाई को प्रेरित करती रहेंगी। इस संस्मरणात्मक कृति के जरिये चलिए कुछ नये तथ्यों से रूबरू होते हुए उन तपते दिनों की आ¡च महसूस कर आए¡।
उपन्यास  से भी रोचक एक पठनीय कृति। 

आज़ादी की बस्ती 

 
क्वआज़ादी  की बस्तीं भले ही प्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी, पत्रकार और लेखिका मनोरमा दीवान के शुरूआती जीवन के उन दस-ग्यारह वषोZ का संस्मरण हो पर यह पाठकों के लिए भारत की आज़ादी के लिए लड़े जाने वाले संघर्ष का एक अलग नज़रिये से देखा गया दस्तावेज है। यह कृति केवल आजादी का संघर्ष ही नहीं इतिहास से भी हमें परिचित कराती है।
देश को  आज़ाद हुए अर्धशती से ज्यादा  हो जाने के बावजूद हम गुलामी से मुक्त होने के लिए किये  जाने वाले बलिदान, स्वतन्त्रता सेनानियों  के संघर्ष और उनमें शामिल लोगों  की भावनाओं को भुला नहीं सकते। उनकी बातें, उन दिनों की घटनाए¡ हमेशा प्रासंगिक बनी रहेंगी और देश की तरुणाई को प्रेरित करती रहेंगी। इस संस्मरणात्मक कृति के जरिये चलिए कुछ नये तथ्यों से रूबरू होते हुए उन तपते दिनों की आ¡च महसूस कर आए¡।
उपन्यास  से भी रोचक एक पठनीय कृति। 


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