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Brazeel Ka Kala Bagh

RRP:
Rs 35.00
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ISBN:
81-89914-08-1
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Preface

ब्राजील का काला बाघ 

मेरे बाहर निकलते ही दरवाजा बन्द करने की आवाज आयी। इसके बाद ही तेज स्वर में पत्नी के साथ उसकी झड़प होती रही। अतिथि के असम्मान से उसे बेहद दुज्ख हुआ था इसमें सन्देह की गुंजाइश नहीं थी। कान लगाकर सुनने की मेरी कोई इच्छा भी नहीं थी इसलिए मैं बरामदे से नीचे बगीचे में उतर आया। कुछ देर बाद ही तेज पदचाप सुनकर पीछे देखा तो वह महिला बाहर निकल आयी थी। उसके चेहरे पर वितृष्णा की भावना फैली हुई थी और आँखें विस्फारित हो रही थीं।


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