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Chat Par Dustak

RRP:
Rs 280.00
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Rs 210.00 (You save Rs 70.00)
ISBN:
81-89914-04-9
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Preface

छत पर दस्तक 

नयी कहानी के दौर के बाद जिन कथाकारों ने अपनी अलग पहचान बनायी, उनमें मृदुला गर्ग एक अग्रणी नाम है। पिछले तीस-पैन्तीस वर्षों से मृदुला जी की कहानियां चर्चा में रही हैं। इसकी वजहें कई हैं, मसलन, शिल्प का चमत्कार, कथ्य में नयापन, किस्सागोई का जादू, विचार की आंच आदि...

मृदुला जी के यहां संबन्धहीनता सम्बन्ध में, मृत्यु जीवन में और जीवन परम्परा में पर्यवसित होकर सातत्य और अमरत्व प्राप्त करता है।

नारी विमर्श में 'विश्व भगिनीवाद' की खुशबू बिखेरती मृदुलाजी की अपनी ही पहचान है जो कल भी विशिष्ट थी, आज भी विशिष्ट हैं।


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