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Chini Yatri Sungyun

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ISBN:
81-89850-81-4
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Preface

चीनी यात्री सुंगयुन 

जब से चीनवालों को बौद्धधर्म का उपदेश मिला तब से चीन के यात्री भारतवर्ष की ओर तीर्थयात्रा करने आते रहे। इन यात्रियों में ये फाहियान और सुयेनच्वांग (हियेनसांग) के अलावा अन्य यात्रियों के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ऐसा ही एक अल्पज्ञात यात्री था सुंगयुन। वह चीन में लोयांग (होनानफू) नगर का निवासी था। 'क्ववान-आईं' वंश से उसका सम्बन्ध था। उसे सन् 518 ई. में उत्तरीय 'वीईं वंश की महारानी ने भिक्षु 'हुईसांग' के साथ पुस्तकों की खोज के लिए पश्चिमी देशों में भेजा था। वह सन् 521 में चीन लौट गया। उसके यात्रा-विवरण में तत्कालीन भारत के पश्चिम-सीमागत देशों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। उसने वेस्सन्तर जातक के लीलास्थलों का सविस्तार वर्णन किया है, जो उद्यान जनपद के आसपास अवस्थित थे। सीमाप्रान्त के देशों के प्रमुख स्थानों का वर्णन जैसा सुंगयुन ने किया है वैसा और किसी ने कम किया है। यही कारण है कि इतना छोटे होने पर भी यह ग्रन्थ बड़े महत्व का है।


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