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Daddu Ki Katha Kahaniyan

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ISBN:
81-89850-22-9
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Preface

दद्दू की कथा कहानियां 

आज गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर हमारे बीच होते और वे बच्चों को अपने आस-पास बिठाकर कहानियां सुनाते तो कितना मजा आता! कल्पना की जा सकती है कि वे कहानियां सुनाते तो किस तरह की सुनाते! वे कोई लोककथा सुनाते या जंगल की कहानियां या लोगों के सुख-दुख की। इसके बारे में सिर्फ सोचा जा सकता है। कितने ही बच्चे सोचते होंगे, काश, हम भी उनसे कोई कहानी सुन पाते।

कथा-कहानियों की यह किताब बच्चों के बीच उनके मौजूद न होने की कमी को काफी हद तक पूरा करती है। रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने यहाँ बड़ी खूबी से अपने दद्दू होने की भूमिका को निभाया है। वे अपनी पोती कुसुमी को कहानी सुनाने के बहाने हमारे आस-पास के अच्छे-बुरे लोगों से परिचित करा देते हैं। इन कहानियों में पुराने दिनों के किस्सों का मजा है तो आज के जीवन के खट्टे-मीठे अनुभव भी हैं। इन किस्मों में तरह-तरह के लोग हैं, उनकी खूबियाँ हैं और खामियां भी हैं।

सीधी-सरल भाषा में बड़ी सहजता से कही गई ये रंग-बिरंगे अनुभवों की कहानियां बच्चों के लिए अनोखा उपहार हैं।


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