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Do Musaphir

RRP:
Rs 100.00
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ISBN:
81-89850-10-5
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Preface

दो मुसाफिर 

बनफूल की गिनती बांग्ला के सशक्त और प्रयोगधर्मी उपन्यासकार के रूप में होती है। संक्षेप में अपनी बात कहने में वे माहिर थे। उपन्यासों में वे कथानक का ऐसा ताना-बाना बुनते हैं कि पाठक उसी में खो जाता है। यह उनकी शैली की बड़ी विशेषता थी।

इस उपन्यास में एक अनाथ लड़की के जीवन में आये बदलाव की कहानी, जो घर में आश्रिता होकर जाती है पर वह उस घर की लक्ष्मी बन जाती है। बल्कि इसमें केवल उस अनाथ लड़की 'मृदुला' की ही कहानी नहीं है, उसके इर्द गिर्द आये तमाम पात्र अपने जीवन का लेखा-जोखा स्वयं विश्लेषित करते है। लेखक ने हर पात्र को प्रथम पुरुष में ही अपनी बात कहने का मौका देकर सबको अपने प्रति ईमानदार बनाया है। प्रेम के प्रति कमजोरी, आपसी संबंधों के प्रति लगाव और तनाव को लेखक ने बड़े ईमानदारी से एक ही रात में व्यक्त किया है। भावनाओं के कोमल तन्तुओं से बुनी गई एक कहानी जो दिल पर असर कर जाती है।


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