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Doosre Kinare Par

RRP:
Rs 250.00
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ISBN:
81-89914-91-X
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Preface

दूसरे किनारे पर 

वल्लभ सिद्धार्थ की ये कहानियां 1965 से 1995 के बीच, कहानी, धर्मयुग, सारिका साप्ताहिक हिन्दुस्तान और हंस आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई थीं, जिनकी चर्चा सिर्फ हिन्दी में ही नहीं सभी प्रादेशिक भाषाओं में हुई है।

बल्लभ सिद्धार्थ एक ऐसे संवेदनशील कथाकार हैं, जो जीवन के हर सुख-दुःख पर न अपनी टिप्पणी करते हैं बल्कि उस विशेष बिन्दु को रेखांकित भी करते हैं, जो तमाम जटिलताओं का कारण होती है। उनकी कहानियां  मुखर होने की अपेक्षा मन में पैठकर संवाद करती महसूस होती हैं। तथा इनमें हताश करनेवाली स्थितियों के वर्णन में भी जूझने का संकल्प परोक्ष में मौजूद रहता है। आम आदमी के हक में लड़नेवाली ऐसी कहानियां ही अपने वक्त की पहचान होती हैं।

संकलन की सभी कहानियों में वस्तु और शिल्प का तालमेल भी उल्लेखनीय है। शिल्प का संयम विषय को उलझाने के बजाय उसे सहज सम्प्रेषणीय बनाने में मदद करता है। हिन्दी कथा साहित्य को जिन रचनाकारों ने अपनी लेखनी से समृद्ध किया है, बल्लभ सिद्धार्थ उनमें अन्यतम रहे हैं। ऐसे लेखक की खुद चयनित कहानियों का यह संकलन आशा है पाठकों को भी विशिष्ट लगेगा।


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