Loading... Please wait...

Ektara

RRP:
Rs 330.00
Your Price:
Rs 248.00 (You save Rs 82.00)
ISBN:
978-81-89962-86-9
Cover:
Quantity:
Bookmark and Share


Preface

एकतारा

'एकतारा' एक नारी के अकेले जीवन-संग्राम की कथा है। जिस तरह क्वइकतारां में एक ही तार होता है, फिर भी वह बजता जाता है, उसी भाँति इस उपन्यास की नायिका देवारती भी जिन्दगी के सफर में अपने मुकाम को हासिल करने के लिए, अकेले ही ऊंचे-नीचे, ऊबड़-खाबड़ राह पर संघर्ष-भरा जीवन राग अलापती रही है।

वह संबंधों को जोड़ने की कोशिश में जीवन-भर तोड़ती रही,यह भी उसमें जीवन की विडंबना थी। इनसान भी इनसान को छोड़ सकता है, यह उपलब्धि उसे उसके छात्र जीवन के प्रेमी ऋतवान ने ही दी थी। मुफस्सल से कोलकाता पढ़ने आयी स्काटिश चर्च की छात्रा देवारती पढ़ने से ज्यादा रिश्तों को तोड़ने के खेल में डूब गई। सुशान्त जाना, शुभाशीर्ष, अमितेशदा, संजयदा—एक के बाद एक बेमानी रिश्तों को जोड़ती,फिर खुद ही तोड़ देती। इन झूठे रिश्तों को जोड़ते-तोड़ते एक दिन उसने पाया कि वह कितनी अकेली हो गई है।

दरअसल 'एकतारा' को उपन्यास कम, बल्कि लेखिका का आत्मकथन कहना ज्यादा सही रहेगा। 'एकतारा' शायद एक ऐसा आईना है, जिसमें शायद लेखिका की जिन्दगी का एक टुकड़ा झलकता है। यह उपन्यास पाठक-पाठिकाओं को रू-ब-रू कराता है एक नारी की अधूरी जिन्दगीनामा से जो ठोकरें तो खाती है, अपनी गलतियों को कबूल करने की हिम्मत भी रखती है।

प्रस्तुत है बंगाल के पाठकों द्वारा बहुप्रशंसित तथा पुरस्कृत उपन्यास—एकतारा!


Find Similar Books by Category


You Recently Viewed...