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Godan

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Rs 175.00
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ISBN:
81-89850-88-1
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Preface

गोदान 

विश्व कथा-साहित्य के दिग्पाल प्रेमचन्द की अमर कृति 'गोदान' हिन्दी का गौरव ग्रन्थ है। नायक होरी, पत्नी धनिया, पुत्र गोबर, बेटियां-सोना, रूपा, भाई हीरा, के साथ ही भोला, झुनिया सिलिया, दातादीन, मातादीन, रायसाहब, मेहता साहब, मालती एक से बढ़कर एक चरित्र, एक से बढ़कर एक स्थितियां, जिनका 'समग्र' स्वाधीनतापूर्व भारत के खेतिहर ग्राम्य समाज का दस्तावेज है। जिस देश में एक आम किसान हाड़ तोड़ मेहनत करने के बावजूद अपनी एकमात्र साध (एक गाय पोसना) को मृत्युपर्यन्त पूरा नहीं कर पाता, वहीं वैतरणी पार करने के लिए उससे गोदान कराया जाता है। ऐसे कितने विडम्बनापूर्ण अंतर्विरोध, उनकी नेकी, उनकी बदी, उनके उल्लास, उनके विपर्यय, कितने रंग, कितने शेड्स, कितनी धार और उन सबका एक बृहत् कोलाज है गोदान जो पाठक को मर्माहत भी करता है और आहत मन को इसके पार जाने को प्रेरित भी करता है।


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