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Hit Hone Ke Pharmule

RRP:
Rs 200.00
Your Price:
Rs 150.00 (You save Rs 50.00)
ISBN:
978-81-89962-89-0
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Preface

हिट होने के फार्मूले 

आपके कलम में जादू है। गुदगुदाने के साथ हर प्रकरण कहीं ने कहीं से चोट करता है। आपका बेलौस व्यक्तित्व साकार हो उठता है। और पढ़ते समय ऐसा लगता है, कि  आप सामने खड़े हैं। ऐसी ही मूल्यवत्ता रचना की सार्थकता है।

—विवेकी राय

गिरीश भाई के व्यंग्य लेखन में हास्य,विनोद,कटाक्ष और परिहास भी व्यंग्य के आसपास विद्यमान रहते हैं। इस कारण उनका व्यंग्य रोचक भी होता है। और पाचक भी। सरसता की एक वेगवती धारा उसमें व्याप्त रहती है। वे नए-नए शब्द भी गढ़ते हैं। सार्थक व्यंग्य-भाषा की खोज उनकी रचना प्रक्रिया का हिस्सा है।

—हरीश नवल

गिरीश ललित विनोद का व्यंग्यकार नहीं है और न ही व्यंग्य की कुनैन गोली को हास्य की चासनी में लपेटकर खिलाने का पक्षधर है। अपितु जब वह लपेटने में आता है तो अच्छे-अच्छों को लपेट देता है। व्यक्ति के प्रति यदि उसका सम्मान है तो उसकी विसंगतियों के विरुद्ध आक्रोश भी। वह व्यक्तिगत प्रहार नहीं, प्रवृत्तियों पर प्रहार करता है।

—प्रेम जनमेजय

गिरीश पंकज इस युग के प्रतिष्ठित व्यंग्यकार हैं। विषय वैविध्य,विसंगति की सूक्ष्म पकड़ और तीव्र भेदन क्षमता उनके व्यंग्य को महत्वपूर्ण बनाती है। उन्होंने व्यंग्य हेतु कथा,निबन्ध और उपन्यास तीनों ही माध्यमों का सफलतापूर्वक प्रयोग किया है। वे अपनी व्यंग्य भाषा को लचकदार बनाने के लिए अन्य भाषाओं के शब्द भी ग्रहण करते हैं। उनकी शैली में एक विशिष्ट किस्म का चुटीलापन है जो उनकी रचनाओं को प्रभावी बनाता है।

—सुभाष चन्दर


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