Loading... Please wait...

Hram

RRP:
Rs 250.00
Your Price:
Rs 188.00 (You save Rs 62.00)
ISBN:
81-89850-06-7
Author:
Cover:
Quantity:
Bookmark and Share


Preface

हरम 

बहुपत्नीत्व पुरुषमात्र की यौनलिप्सा की आदिम ग्रंथि है और 'हरम' उसकी सामान्य परिणति। तुर्की बादशाहों के महलों से लेकर भारतीय राजों-राजवाड़ों के अन्त:पुर में कैसे-कैसे सजता गया सुन्दरियों का अजायबघर, कैसे-कैसे स्वर्गिक उपादान थे भोग के और कैसी-कैसी थीं बन्दिशें! नियन्त्रण के लिए निष्ठुर हिजड़ों के पहरे, काम क्रीड़ा के नये-नये करतब और छींजते पौरुष की अटपटी हरकतों के बीच आहत अतृप्त वासनाएं! साजिशों की सरगोशियां और कफस की घुटती, दम तोड़ती चीखें! विचित्र दुनिया थी हरम की।

मध्यकाल के इस जुगुसिप्त इतिहास के रहस्य से यवनिका उठाती श्रीपान्थ की शोधपूर्ण पुस्तक का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया है मुक्ति गोस्वामी ने।


Find Similar Books by Category


You Recently Viewed...