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Isi Desh Ke Isi Shahar Mein

RRP:
Rs 240.00
Your Price:
Rs 180.00 (You save Rs 60.00)
ISBN:
978-81-89962-67-8
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Preface

इसी देश के इसी शहर में

विभा रानी की कहानियां अनास्था के गहराते कुहासे में आस्था का संधान हैं। वे मनुष्य के मनुष्यत्व पर विश्वास करती हैं, उसके श्रम, संघर्ष, जद्दोजहद और जिजीविषा पर विश्वास करती हैं, समाज पर विश्वास करती हैं, समाज के सपोटिंग सिस्टम पर विश्वास करती हैं। यह विश्वास कि किसी भी समप्रदाय कौम, जाति, धर्म या समय के एक-आध या कुछ लोग खराब हो सकते हैं, सभी नहीं; जीवन की कोपलें यहीं से फूटती हैं।

न यह विश्वास कोई यूटोपिया है, न ही विभाजी के पात्र कल्पना के आकाश से टपके हुए हैं, वे इसी धरती के हाड़-मांस के जीवित लोग हैं। मैथिली और हिन्दी में समान रूप से लिखनेवाली विभा रानी का हिन्दी कहानियों का यह तीसरा कथा-संग्रह है—'इसी देश के इसी शहर में', जिसके बारे में दावे के साथ कहा जा सकता है कि विभाजी ने आगे बढ़कर कुछ वर्जित क्षेत्रों में पहली बार कदम रखा है और नयी जमीन तोड़ी है।

यह संग्रह पाठकों को अवश्य ही चिन्तन के लिए विवश करेगा।


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