Loading... Please wait...

Jane Larki Pagli

RRP:
Rs 160.00
Your Price:
Rs 120.00 (You save Rs 40.00)
ISBN:
81-89914-42-1
Author:
Cover:
Quantity:
Bookmark and Share


Preface

जाने लड़की पगली 

जानी-मानी कवयित्री सुनीता जैन द्वारा माँ और बेटी के पारस्परिक संबंधों के रेशमी धागों से बुना यह महावस्त्र जाने लड़की पगली संभवत: समकालीन हिन्दी कविता की सबसे अधिक पठित और चर्चित पुस्तकों में एक है।

सामान्यत: हर भाषा में माँ पर दो-चार कवितायें मिलेंगी लेकिन माँ की मृत्यु के बाद सतत् दो वर्षों तक एक ही मूड में रहना और 75-76 कवितायें लिखना एक बड़ी सहज साधना है। सहज इस लिए कि समस्त कविताओं में बेटी अपनी माँ को विभिन्न रूपों, अवस्थाओं में देखकर अलग-अलग दृष्टिकोण से कवितायें लिखती जाती है और कहीं भी दो कविताओं में एकरसता नहीं मिलती तथा कृत्रिमता, प्रयास-सिद्धता एवं अनगढ़पन से दूर एक उत्स्फूर्तता और समृद्ध सादगी आद्योपान्त रिलक्षित होती है। इस तरह से यह महाकाव्यीय वस्तु का विभिन्न पहलुओं से वलोकन है। शायद ही किसी भाषा में इतनी बड़ी संख्या  में कवितायें माँ को लेकर एक कवि द्वारा लिखी गईं हों।


Find Similar Books by Category


Related Books

You Recently Viewed...