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Jangal ki kahaniyan

Price:
Rs 95.00
ISBN:
978-81-908656-2-3
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Preface

जंगल की कहानियाँ

विडम्बना यह है कि बाल साहित्य के अन्तर्गत अकसर प्रेमचन्द की उन कहानियों की चर्चा होती है, जो उन्होंने बच्चों के लिए नहीं, बड़ों के लिए लिखी थीं; और अफसोस, बच्चों के लिए लिखी गयीं एक-से-एक रोचक और खूबसूरत कहानियों को एकदम भुला दिया गया। जब कि सच तो यह है कि वे कहानियाँ इतनी वैभवपूर्ण कहानियाँ हैं कि सीधे बाल पाठकों के दिल में उतरकर उन्हें अधिक सरल, मानवीय और करुणायुक्त बनने की सीख देती हैं।

‘जंगल की कहानियाँ’ में कुल मिलाकर बारह कहानियाँ हैं, जो प्रेमचन्द ने अपने जीवन के आखिरी दौर में लिखी थीं, जब वे एक तरह से कीर्ति के शिखर पर थे। उस समय उन्हें बच्चों के लिए लिखना जरूरी लगा,यह बात खुद में बाल साहित्य के महत्त्व को उजागर कर देती है।


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