Loading... Please wait...

Kanhai ke jagaibaba : Ratan, Lakshmi

Price:
Rs 85.00
ISBN:
978-81-906770-1-1
Author:
Quantity:
Bookmark and Share


Preface

कन्हाई के जगाई बाबा

अगले दिन सुबह लाल फल खाकर जगाई बाबा से विदा लेकर सडक़ पर पैर रखते ही कन्हाई को लगा कि उसके शरीर में खून बड़ी तेजी से दौडऩे लगा है, इसके बाद चलते हुए उसने देखा कि उसे चलने की बजाय दौडऩे की जरूरत है। वह दौड़ कैसी बेदम दौड़ थी, उसे अब कैसे बताऊँ। रास्ते के दोनों ओर पेड़-पौधे, घर-द्वार, लोग-बाग, गाय-बकरियाँ सब तीर की गति से विपरीत दिशा में चली जा रही थीं, पैरों के नीचे से जमीन सनसनाकर छूटती जा रही थी, दुकानों के पास हवा के सों-सों शब्द से लगता था, कान में ताला लग गया है, देखते-देखते दोनों तरफ के दृश्य बदलते जा रहे थे—गाँव से शहर, शहर से खेत-खलिहान, खेतों से जंगल, जंगल से फिर गाँव। रास्ते में दो नदियाँ पड़ीं, क्षण में वह नदी कन्हाई के पैरों के नीचे से खिसक गयी, एड़ी तक को भीगने का वक्त नहीं मिला।

 

दिन चढऩे के पहले कन्हाई को सामने एक बड़ा शहर नजर आया। उसने दौडऩा बन्द कर दिया और पैदल चलने लगा। बाकी रास्ता उसे उसी तरह पैदल चलना था, नहीं तो दूसरे राहगीर क्या सोचते? उसकी ओर लोगों का ध्यान जाय, यह कन्हाई नहीं चाहता था।


Find Similar Books by Category


Related Books

You Recently Viewed...