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Kapalkundla / Devichoudhary

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ISBN:
81-89850-52-0
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Preface

कपालकुण्डला और देवी चौधुरानी 

बांग्ला के प्रारम्भिक दौर के उपन्यासकारों में बंकिमचन्द्र चटर्जी का नाम अग्रगण्य है और बंकिम बाबू के उपन्यासों में 'कपालकुण्डला' और 'देवी चौधुरानी' के नाम प्रथम पांक्तेय!

कथ्य के लिहाज से पराधीनता-काल की खोयी हुई जातीय गरिमा को अतीत के अंधेरों में तलाशने का काम दोनों ही उपन्यास करते हैं—'कपालकुण्डला' चार शताब्दी वर्ष पूर्व। एक मुगलों का शासनकाल तो दूसरा अंग्रेजों का। जाने-पहचाने ऐतिहासिक चरित्रों के साथ सामाजिक चरित्रों और घटनाओं को गूंथकर रचे गये ये उपन्यास आज भी न सिर्फ कथ्य के लिहाज से बेहद पठनीय हैं बल्कि शिल्प के स्तर पर भी अप्रतिम हैं।

संस्कृत के प्रभाव के बावजूद, तकनीक के लिहाज से भी प्राय: सौ साल पहले के लिखे गये ये उपन्यास आज भी नव्य हैं और रोचक तो इतने कि एक बार उठाइए तो बिना पूरा किये आप इन्हें छोड़ना नहीं चाहेंगे।


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