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Katha Samagra (Ramkumar)

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ISBN:
81-89914-55-3
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Preface

कथा-समग्र रामकुमार

विख्यात चित्रकार कुमार रामकुमार पाँचवे-छठे दशक के जाने माने कथाकार रहे हैं। भारतीय मध्यवर्गीय शहरी जीवन के वे अद्भुत चितेरे हैं। उनकी कहानियां एक कलाकार की लिखी हुई कहानियाँ हैं। एक सपाट-सी दिखनेवाली कथावस्तु को वे अपनी संवेदन दृष्टि के रंग-विन्यास,अर्थ व्यंजक भाषा और चित्र शैली से अनुपम कृति में बदल देते हैं। उनकी कहानियों की विशेषता है कि पढ़ने के बाद उनका प्रभाव जाडे़ के गीले कुहासे की तरह हमारे चारों ओर पसर जाता है। वे मौन में ले जाते हैं मगर वह मौन सूक्तियां की तरह व्यंजित भी होता है।

रामकुमार की कहानियों में भारतीय परिवार का नित्यप्रति का संघर्ष एक ठहराव जैसी स्थिति में हमें नज़र आता है। उनमें उत्ताप नहीं दिखता,बल्कि दर्द की मद्धिम आंच महसूस की जा सकती है। रामकुमार की कहानियों में संवेदना का रंग गहरा होता है, जिसके जरिये वे किसी धूसर कैनवास पर चित्र बनाने की कोशिश करते हुए लगते हैं। कई बार लगता है उनकी कलम हमें किसी गुफा के अन्धलोक में लिये जा रही है पर यह उनके शिल्प की खूबी है कि वे उसी राह से उजाले की ओर ले आते हैं।

रामकुमार कला और साहित्य के प्रति समर्पित एक ऐसे सूफी-किस्म के कृतिकार हैं जो बिना आत्मप्रचार के अपने सृजन-कार्य में जुटे रहते हैं। इसलिए समर्थ रचनाकार होने के बावजूद उनके कथा साहित्य की अपेक्षित चर्चा नहीं हुई। नयी पीढ़ी के लेखकों में से कम ही होंगे जो रामकुमार की कृतियों से रू-ब-रू हुए होंगे। उनकी कहानियों की एकाधिक पुस्तकें तो अब अनुपलब्ध भी हैं। रामकुमार के महत्व को देखते हुए रेमाधव प्रकाशन उनकी सभी कृतियों का पुनर्प्रकाशन कर रहा है। हमें विश्वास है कि रामकुमार की संपूर्ण कहानियों का यह विशिष्ट संग्रह हिन्दी कथा साहित्य की एक बड़ी कमी को पूरा करेगा।


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