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Krashandwapayan Vayas

RRP:
Rs 250.00
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ISBN:
81-89850-34-2
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Preface

कृष्ण द्वैपायन व्यास 

चर्मवस्त्र पहनने वाला काले रंग का वह व्यक्ति, जिसका जन्म भी कुतूहल-भरा है और कर्म भी, जिसकी देह की उत्कट गन्ध असहनीय है लेकिन जिसकी सुगन्ध युग-युगान्तर तक 'महाभारत' में व्याप्त है, जो है तो जन्म से ही गृहत्यागी, वीतरागी, तटस्थ महर्षि लेकिन जो अपनी माँ की पुकार पर सामान्य सन्तान की तरह दौड़ा चला आता है, जो महाभारत का सूत्र भी है, सूत्रभार भी...

महाभारत विशेषज्ञ बांग्ला के सुख्यात विद्वान लेखक नृसिंहप्रसाद भादुड़ी के बौद्धिक मन्थन से उत्पन्न महाभारत के महान चरित्रों के विश्लेषण के क्रम में पहली कड़ी कृष्णद्वैपायन व्यास को हिन्दी में पहली बार प्रस्तुत करते हुए हमें गर्व है।

इसी क्रम में हम भादुड़ी जी द्वारा महाभारत के अन्य प्रवीणों—भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, धृतराष्ट्र और विदुर पर भी इसी तरह का गंभीर विश्लेषण प्रकाशित करने जा रहे हैं।


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