Loading... Please wait...

Laloo

RRP:
Rs 35.00
Your Price:
Rs 26.00 (You save Rs 9.00)
ISBN:
81-89850-79-2
Author:
Cover:
Quantity:
Bookmark and Share


Preface

लालू 

लालू के पिताजी गाँव के पैसेवाले आदमी थे। कुछ साल पहले उन्होंने अपना पुराना मकान तुड़वाकर तिमंजिला मकान बनवाया था। तभी से लालू की माँ चाहती थीं कि वे अपने गुरुदेव को भी एक बार इस घर में बुलाकर उनके पैरों की धूल लें। मगर उनके गुरु की भी उम्र काफी हो चुकी थी। अपने गाँव फरीदपुर से इतनी दूर आने के लिए वे राजी नहीं हुए। मगर इस बार संयोग से उन्होंने ऐसा मौका मिल गया। गुरुदेव सूर्यग्रहण के मौके पर काशी गये थे। वहाँ से उन्होंने चिट्ठी भेजी थी कि वे लौटते समय लालू की माँ नन्दरानी को आशीर्वाद देने उनके यहाँ आयेंगे। लालू की माँ की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वे गुरुदेव के आवभगत की तैयारी में लग गईं। उन्हें खुशी थी कि इतने दिनों के बाद अब उनकी मनोकामना पूरी होगी। गुरुदेव उनसे मिलने यहाँ आयेंगे। उनके पैरों की धूल से उनका घर पवित्र हो जाएगा। मकान की पहली मंजिल के एक कमरे का सारा सामान हटा दिया गया। वहीं गुरुदेव के रहने का इन्तजाम किया गया। उनके लिए नये निवाड़ की खाट मंगवायी गई। गुरुदेव के सोने के लिए नये बिस्तर बनवाये गये। उस कमरे के एक कोने में उनकी पूजा-पाठ की जगह बना दी गई, क्योंकि तिमंजिले के पूजाघर में जाने के लिए उन्हें उतनी सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में तकलीफ होती।


Find Similar Books by Category


You Recently Viewed...