Loading... Please wait...

Master Anshuman

RRP:
Rs 80.00
Your Price:
Rs 60.00 (You save Rs 20.00)
ISBN:
81-89850-24-5
Author:
Cover:
Quantity:
Bookmark and Share


Preface

मास्टर अंशुमान 

दूसरे दिन डायरेक्टर सुशील बाबू मुझे देखने आये थे। सज्जन गंभीर मिजाज के होने के बावजूद गुस्सैल नहीं लग रहे थे। उनके कहने पर मैंने पुरातन मृत्युं नामक कविता लयबद्ध ढंग से सुना दी। कविता-पाठ करके उन्हें सुनाया था। मुझे लग रहा था उससे वे प्रसन्न हुए थे।

'लेकिन दो-चार दिनों में तुम्हारा एक कैमरा टेस्ट लेना होगा।' सुशील बाबू ने कहा था, 'उसकी सूचना बिशु तुम्हें दे देगा। दो-चार पंक्तियों का डायलॉग तुम्हें भेज दू¡गा। तुम उसे याद कर लेना।''

सुशील बाबू के चले जाने के बाद पिताजी ने कहा था, 'देखो बेटा, यह भी एक तरह का इम्तिहान है। तुम स्कूल के इम्तिहान में अच्छा करते ही हो, इसमें भी अच्छा प्रदर्शन करना होगा। स्कूल में जैसे तुम्हारे शिक्षक होते हैं। उसी तरह यहाँ डायरेक्टर तुम्हारे शिक्षक होंगे। स्कूल में जिस तरह अपनी पढ़ाई याद करते हो, उसी तरह अपना डायलॉग याद करना पड़ेगा।''

मुझे डर था कि शायद माँ आपत्ति करेंगी, लेकिन वह भी एक बार में ही राजी हो गई थीं। बेटा करीब एक महीने तक उनसे दूर रहेगा, यह सोचकर वे थोड़ी हिचकिचा रही थीं, लेकिन मेरे माता-पिता दोनों बिशुदा से इतना प्यार करते थे कि उन पर मेरी ज़िम्मेदारी सौंपकर वे निश्चिन्त थे।


Find Similar Books by Category


You Recently Viewed...