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Mithila : Loksanskriti Avam Lokkathayn

RRP:
Rs 250.00
Your Price:
Rs 188.00 (You save Rs 62.00)
ISBN:
978-81-89962-14-2
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Preface

मिथिला : लोक-संस्कृति एवं लोककथाएं 

मिथिला लोक एवं शास्त्र के समन्वय की भूमि है। वैदिक-औपनिषदिक चिन्तन के क्षेत्र में मिथिला की उपलब्धियाँ जितनी महत्वपूर्ण  हैं,  उतनी ही महत्वपूर्ण एवं समृद्ध वहाँ की लोक-परम्परा भी है। नागरिक जीवन और मुख्यधारा के इतिहास के स्त्रोत जहाँ राज्याश्रित लेखन, ताम्रलेख एवं शिलालेख होते हैं; वहीं लोकजीवन के इतिहास के स्त्रोत होती है लोककथाएं, दन्तकथाएं और अनुश्रुतियां। लोक-परम्परा के स्त्रोत श्रुति-परम्परा में होने के कारण कालप्रवाह में कम प्रदूषित होते हैं और इसलिए अपने प्रसार-क्षेत्र के तृणमूल से लेकर अभिजात-वर्ग तक का बेबाक और अधिक विश्वसनीय चित्र उपस्थित करते हैं।

इस संग्रह की कथाएं मिथिला के हर कोने एवं हर वर्ग से चुनी हुई हैं। इनमें कुछ कथाओं को तो दन्तकथाओं से लोककथाओं में रूपान्तरित हुए बहुत समय भी नहीं हुआ है। ये कथाएं रंजक तो हैं ही, आपका परिचय वहां के लोकजीवन के हर पहलू से कराती हैं।

मिथिला के इतिहास, वहाँ की संस्कृति एवं परम्परा पर लम्बी भूमिका वहाँ  की लोककथाओं के परिवेश को समझने में सहायक होगी।


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