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Nari Ka Mukti Sanghrash

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ISBN:
81-89850-83-0
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Preface

नारी का मुक्ति संघर्ष 

'सन्तान आमतौर पर पिता के नाम से ही क्यों जानी जाती हैं जबकि नौ माह तक पेट में रखने, उसे जनने और पालन-पोषण तक की सारी जिम्मेदारी माँ ही निभाती हैं?...वैध और अवैध सन्तान क्या होती है? क्या माँ का अपने गर्भ से बच्चा जन देना सन्तान की वैधता के लिए पर्याप्त नहीं? औरतों के पक्ष में होने वाले कानूनों के लाभ से भी औरतें क्यों वंचित रह जाती हैं?'

शताब्दियों से नारी उत्पीड़न से जुड़ नारी के कठघरे में खड़ा कराते हैं और इन तमाम दोहरे मानदण्डों और पक्षपातों पर उससे जवाब चाहते हैं।

अमरनाथ की पुस्तक क्वनारी का मुक्ति संघर्षं नारी मुक्ति से जुड़े उन तमाम प्रश्नों से जूझती ही नहीं बल्कि उनके सम्यक निदान का दिशा-संकेत भी करती है। विषय का प्रतिपादन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किकता और प्रामाणिक सन्दर्भ नारी विमर्श को नयी धार देते हैं।


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