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Nashtneer

RRP:
Rs 165.00
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ISBN:
978-81-89962-73-9
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Preface

नष्टनीड़

अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बांग्ला फिल्म निर्देशक और लेखक सत्यजित रे द्वारा बनायी फिल्मों में 'चारूलता' का अलग स्थान है। इस फिल्म को राष्ट्रपति के स्वर्णपदक के अलावा कई राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले।

'चारूलता' के सराहे जाने के पीछे उसकी कहानी तथा उसकी प्रस्तुति एक बड़ा कारण है। उल्लेखनीय है कि सत्यजित रे की 'चारूलता' महान साहित्यकार रवीन्द्रनाथ ठाकुर की लम्बी कहानी 'नष्टनीड़' पर आधारित है। रवीन्द्रनाथ की इस कहानी में दांपत्य जीवन के एक अनोखे पहलू का संवेदनात्मक विश्लेषण मिलता है। एक स्त्री के यौवन की उमंगों और उसके अकेलेपन का बेहद मार्मिक और बारीक चित्रण इस कहानी की विशेषता है। मनलायक साथ न मिल पाने की कचोट विवाहित जीवन के सारे भौतिक सुखों को धराशायी कर देती। और पति-पत्नी को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा करती है,जहां एक दूसरे को समझने के आगे के सारे रास्ते बन्द नज़र आते हैं। और यह एक बसे-बसाये घरौन्दे के उजड़ जाने का कारण बन जाता है।

चारूलता के अकेलेपन, उसके दांपत्य जीवन के उहापोहों, नैतिक-अनैतिक के द्वन्द्वों और चारू के पति भूपत की निसंगता की पीड़ा आदि को रवीन्द्रनाथ की भांति सत्यजित रे ने भी इस फिल्म में फोकस किया है। यह कहा जा सकता है कि 'नष्टनीड़' में लेखक ने विषय को विस्तार दिया है और चारूलता में फिल्म निर्देशक ने उसे गहराई दी है।

दामपत्य जीवन के राग-विराग पर तमाम कहानियां लिखी गई हैं, पर रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कहानी 'नष्टनीड़' आज भी बेजोड़ मानी जाती है।


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