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Paglaa Dasu

Price:
Rs 45.00
ISBN:
978-81-89962-07-4
Author:
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Preface

पगला दासू

दासू यानी दासरथी जब पहले-पहल हमारे स्कूल में भर्ती हुआ, तब तक जगबन्धु को अपनी कक्षा का सबसे अच्छा विद्यार्थी समझा जाता था। पढ़ाई में अच्छा होते हुए भी उसके जैसा ईष्र्यालु ‘भीगी बिल्ली’ हम लोगों ने नहीं देखा था। दासू एक दिन जगबन्धु के पास एक अँग्रेजी शब्द का अर्थ समझने गया था।

जगबन्धु ने उसे नाहक जली-कटी सुनाते हुए कहा, ‘‘मुझे क्या कोई और काम नहीं है?’’ आज किसी को अँग्रेजी समझाऊँ, कल किसी का सवाल हल कर दूँ; परसों कोई और फर्माइश लेकर चला आएगा...बस यही करता रहूँ। ‘‘दासू ने भी बिगडक़र कहा, ‘‘तुम तो बड़े पाजी, छोटे दिलवाले हो।’’ जगबन्धु ने पण्डित जी से शिकायत की—‘‘यह नया लडक़ा मुझे गाली दे रहा है।’’ पण्डित जी ने दासू को ऐसा डाँटा कि बेचारा चुप हो गया।।

हमें अँग्रेजी बिट्टू बाबू पढ़ाते थे। जगबन्धु उनका प्रिय छात्र था। पढ़ाते वक्त जब उन्हें पुस्तक की जरूरत पड़ती थी, वे उसे जगबन्धु से ले लेते थे। एक दिन उन्होंने पढ़ाते समय व्याकरण की किताब माँगी, जगबन्धु ने झटपट अपनी हरे जिल्दवाली अँग्रेजी व्याकरण की किताब उन्हें थमा दी।


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