Loading... Please wait...

Rahogi Tum Wahi

RRP:
Rs 320.00
Your Price:
Rs 240.00 (You save Rs 80.00)
ISBN:
81-89914-20-0
Author:
Cover:
Quantity:
Bookmark and Share


Preface

रहोगी तुम वही 

पवालों के सलीब पर टंगे मानव मुक्ति के मुद्दों को चित्त करती सुधा अरोड़ा आज दबी-कुचली, निर्यातित, अपमानित औरतों की प्रबल पैरोकार बनकर सामने आयी हैं। सुधाजी की ये कहानियां अलग-अलग क्षेत्रों में आदमी के निरन्तर डीह्युमनाइज होते जाने के विरुद्ध एक मुखर प्रतिवाद हैं।

सुधाजी की कहानियों में चेतना के अंतर्विरोधी की कई-कई परतें और कई-कई आवर्तन हैं जो संश्लिष्ट संबंधों की जटिलता का विराट अनुभव फलक रचते हैं। देह के एकांगी प्रचारित सत्य को देह और जीवन, जीवन और जगत के सम्पूर्ण सत्य में अनूदित करती दर्द को मन, महज भोग्या में रेडक्रूस की जा रही नारी अस्मिता का भौतिक सत्य क्या है।

सुधा अरोड़ा की कहानियां जहाँ खत्म होती हैं, वहीं से विमर्श और चेतना का द्वितीय चरण शुरू होता है।


Find Similar Books by Category


You Recently Viewed...