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Rat Mein Sagar

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Rs 185.00
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ISBN:
81-89914-83-9
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Preface

रात में सागर

चन्द्रकान्ता उन विरल लेखिकाओं में हैं जिन्होंने कश्मीर और पंजाब के आतंकवाद से उत्पन्न करुण मानवीय स्थितियों को रचना का केन्द्र बनाया है। वैसे भी कश्मीर हिन्दी साहित्य में उतना नहीं आया जितना आना चाहिए था। भूमण्डलीकरण के इस दौर में,वैज्ञानिक अभिज्ञानों के आलोक में टूटते, चरमराते स्त्री-पुरुष यौन संबंध और इतर द्वन्द्वात्मकताए इनके लेखन के उपजीव्य रहे हैं।

लेखिका की कहानियों का अनुभव-वृत्त अत्यन्त विस्तृत है। ये कहानियां उस चौहद्दी का अतिक्रमण करती हैं जिसे केवल 'महिला लेखन' के सीमित दायरे में समेटा जाता है। इन कहानियों में काल तथा संस्कृतियों के द्वन्द्व भी सामने आये हैं।

चन्द्रकान्ता जी का आत्मकथन बिलकुल सही लगता है कि मनुष्य विरोधी व्यवस्था के प्रतिपक्ष में खड़ी ये कहानियां दोतरफा खुलने वाली खिड़कियां हैं...


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