Loading... Please wait...

Srashti Avam Prantattav

RRP:
Rs 400.00
Your Price:
Rs 300.00 (You save Rs 100.00)
ISBN:
81-89914-94-6
Author:
Cover:
Quantity:
Bookmark and Share


Preface

सृष्टि एवं प्राणतत्व 

प्राण का सर्वप्रमुख संलक्षण गति है और गति का यह वैशिष्ट्य अपने उद्गम-स्थल आकाश में क्रिया करता है। आकाश में संचरण करते हुए, विकास एवं संयोजन करते हुए यह तत्वों का सृजन करता है जिनसे सूर्य, नक्षत्र पथ एवं ग्रह निर्मित हुए हैं।

यह अग्नि, जल और वायुमण्डल, पृथिवी, पाषाण और धातु, वनस्पति, मत्स्य, पशु और पक्षी सबको विकसित एवं उत्पन्न करता है। आकाश में संचरण करते हुए यह अपनी ऊर्जा से उन समस्त अनन्त रूपों की प्रकृति, गति, शक्ति एवं क्रिया का निर्धारण करता है, जिन्हें इसने उत्पन्न किया है।

इस तत्व के संयोजन एवं कार्य से सूर्य निर्मित हुआ, अग्नि प्रकट हुई, पर्जन्यों को रूप मिला, एक पिघला हुआ गोला ठण्डा होकर पृथिवी के रूप में ठोस हो गया। इस तत्व की ऊर्जा से सूर्य प्रकाश एवं ताप देता है, अग्नि जलती है, बादल बरसते हैं, पृथिवी घूमती है। न केवल चेतन, बल्कि समस्त अचेतन सत्ता का जीवन और कार्य भी इसी प्राण-ऊर्जा के कारण है।

प्राण ही ब्रह्माण्ड-गति का स्त्रष्टा और संचालक है।

—श्री अरविन्द

ऊर्जा (एनर्जी) इस भौतिक जगत् का मूल है और प्राण सम्पूर्ण सृष्टि का मूल संरचक तत्व है। इस तरह ऊर्जा प्राण का स्थूलतम प्राकटक है और सृष्टि-स्पेक्ट्रम के एक सिरे पर है। स्थूलतम यह इसलिए है, क्योंकि इसके पास न्यूनतम स्वातन्य है। अपनी गति बदलने के लिए या अन्य किसी वांछित दिशा में प्रवाहित होने के लिए इसे एक बाह्य कर्ता या कारण की जरूरत है।

प्राण में स्वातन्त्रय है। वह स्वयं प्रवृत्त होता है। वह स्वेच्छा से संचरण कर सकता है और स्वयं परिवर्तित हो सकता है। उसमें करने, न करने तथा अन्यथा करने की शक्ति है।

प्राण की स्वतन्त्रता की वृद्धि के साथ संयुक्त हैं उच्चतर क्षमताएँ,शक्ति और आनन्द। सूक्ष्मतम रूप में प्राण पूर्ण आनन्द की एक ऐसी अवस्था है,जिसमें कोई प्रत्यक्ष क्रियाशीलता नहीं है। इस आनन्द के मूल में नीरवता की स्थिति है। इस नीरवता को शुद्ध चैतन्य कहा जाता है,जिसमें न्यूनतम अंश में भी जड़ता या तमस् नहीं है। यह प्राण की कारण अवस्था है—प्राणिक स्पेक्ट्रम का मूल सूक्ष्मतम छोर। इस स्पेक्ट्रम का स्थूलतम छोर भौतिक द्रव्य है।

—डॉ. नागेन्द्र


Find Similar Books by Category


Related Books

You Recently Viewed...