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Striling Nirman

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Rs 275.00
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ISBN:
81-89850-91-1
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Preface

स्त्रीलिंग निर्माण 

जन्म के साथ कन्या शिशु को नहीं पता होता कि वह नर है या नारी। यह बोध तो उसके विकास-क्रम में उसे कदम-कदम पर कराया जाता है कि तुम औरत हो, औरत मर्दों की सत्ता से तुम्हारा अस्तित्व पृथक और भिन्न है। लम्बी चोटी बांधो, ऐसे कपड़े पहनो, रसोईघर देखो। धीमे बोलो, धीमे हंसो, ये बाहर आँखें फाड़-फाड़कर क्या देखे जा रही हो, शर्म करो, औरत हो! आचार संहिता की लम्बी फेहरिश्त! लक्ष्मण-रेखा का कसता परिवृत्त!

धर्म, परम्परा, साहित्य, समाज, दर्शन—सभी कोणों से विषय को संश्लेषित-विश्लेषित करते हुए प्रसूतिगृह से चिता की अन्तिम सेज तक किस तरह एक मासूम बच्ची को मनचाही औरत में ढाला जाता है, किस तरह औरत होने के नाते उसके पग-पग पर भेदभाव करते हुए उसे पुरुष के प्रतिपक्ष के रूप में खड़ा किया जाता है, इस अन्याय और पक्षपात का खुलासा करती हैं बांग्ला कवयित्री और विदुषी मल्लिका सेनगुप्त 'स्त्रीलिंग निर्माण' में।

रोचक अन्दाज में लिखी गई, स्त्री विमर्श की एक विचारोंत्तेजक पुस्तक।


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