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Subah Se Pahale

RRP:
Rs 275.00
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ISBN:
81-89850-16-4
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Preface

सुबह से पहले 

बांग्ला के बहुचर्चित कथाकार बुद्धदेव गुहा की रचनाओं में आधुनिक जीवन की विसंगतियों और संघर्षों का व्यापक चित्रण मिलता है तथा जीवन को देखने का नया दृष्टिकोण भी। यही खूबियां उनके क्वसुबह से पहले उपन्यास में भी देखने को मिलती हैं।

इस उपन्यास के तीन प्रमुख पात्र हैं—अवकाशप्राप्त वृद्ध पिता शुभेन तथा नि:स्वार्थ भाव से कर्तव्यरत एक समर्पिता युवती  कुड़ी। पिता-पुत्र और प्रेमिका का यह त्रिकोण पात्रों के अपने अन्तरद्वन्द्वों और अकेलेपन की समस्याओं से जूझता हुआ उपन्यास को गति प्रदान करता है। यह अकेलापन ही इस उपन्यास की मुख्य समस्या है जिसमें कमोबेश आज हर व्यक्ति जूझ रहा है। मानू बाबू अपनी वृद्धावस्था में अपने बेटे शुभेन के साथ की कामना करते हैं तो कुड़ी भी कुछ ऐसा ही चाहती है, लेकिन प्रवासी शुभेन की महत्त्वाकांक्षा किसी भी प्रकार की भावुकता को आड़े नहीं आने देना चाहती। सफलता की चाह ही उसकी विवशता है जो उसे अपने बीमार वृद्ध पिता और कुड़ी जैसी गुण संपन्न नारी के जीवन से दूर ले जाती है।

भावुकता और यथार्थ के कोमल-कठोर द्वन्द्व के बीच पनपती इस उपन्यास की कथा आज के जीवन-मूल्यों को लेकर कई सवाल खड़े करती है, जो पाठकों को भी सोचने को विवश करेगी। आज के दौर का एक महत्वपूर्ण उपन्यास।


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