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Sundarvan Mein Sat Varash

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ISBN:
81-89850-18-0
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Preface

सुन्दरवन में सात वर्ष 

किशोरों के लिए रहस्य-रोमांच से भरी 'सुन्दरवन में सात वर्ष' पुस्तक का प्रकाशन बांग्ला में करीब आधी सदी से पहले हुआ था, विभूतिभूषण बन्द्योपाध्याय की मृत्यु के दो वर्ष बाद।

अपने दुर्गम इलाकों, घने पेड़-पौधों, हिंसक जानवरों और छोटी-बड़ी नदियों तथा समुद्र से घिरा सुन्दरवन लोगों को हमेशा आकर्षित करता रहा है। सुन्दरवन को लेकर ले न जाने कितने रहस्य और भय लोगों के बीच प्रचलित रहे हैं। इस उपन्यास में भी ऐसी कुछ रहस्य-रोमांच की बातें पढ़ने को मिलेंगी। उपन्यास की खूबी है कि इसमें रोमांचक परिस्थितियों का चित्रण तो मिलता है पर यह किशोर पाठकों के मन में, विपरीत स्थितियों में भी, अपनी राह बनाने का साहस जुटाता है।

विभूतिभूषण बन्द्योपाध्याय ने इस पुस्तक की भूमिका में लिखा था कि इस पुस्तक के अन्तिम कुछ अध्याय ही उनके द्वारा लिखे गये हैं। इससे लोगों के मन में यह भ्रम होता है कि उपन्यास के प्रारम्भिक हिस्से किसी और के, कुछ के अनुसार भुवनमोहन राय के, द्वारा लिखे गये थे। मगर जो भी तथ्य हो, विभूति बाबू के किशोर साहित्य संग्रह में यह पुस्तक उन्हीं के नाम से संग्रहीत है और पाठक भी इसे विभूति बाबू की ही कृति के नाम से जानते हैं।

बहरहाल इस उपन्यास को किसने कितना लिखा, इस रहस्य को यहीं छोड़कर, आइए इस उपन्यास के रोमांच से रू-ब-रू हुआ जाए।


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